शिक्षा के अधिकार कानून के क्रियान्वयन की स्थिति दयनीय

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पटना । राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विविद्यालय (न्यूपा) की प्रो. नलिन जुनेजा ने कहा कि देश में शिक्षा के अधिकार कानून के क्रियान्वयन की स्थिति दयनीय है। इसके कानूनी पहलूओं का किसी भी राज्य में अक्षरश: पालन नहीं किया जा रहा है। इसे लागू करने के लिए इस कानून पर विास करना होगा। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाना होगा। साथ ही इसके कानूनी पहलूओं को भी अक्षरश: क्रियान्वयन करना होगा। उन्होंने ये बातें बिहार म्यूजियम में ‘‘भारत में शिक्षा के अधिकार का क्रियान्वयन’ विषय पर दो दिवसीय सेमिनार में कहीं। यह सेमिनार पटना विविद्यालय के स्नातकोत्तर, शिक्षा विभाग, बिहार म्यूजियम और सूर्यस्थली ह्यूमन वेलफेयर सोसाईटी के संयुक्त त्वावधान में आयोजित हुआ। प्रो. जुनेजा ने कहा कि ‘‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ में बदलाव से कुछ नहीं होगा। जरूरत है स्कूली शिक्षकों के अध्यापन कौशल के तौर-तरीके में बदलाव लाने की। तभी शिक्षा का अधिकार कानून का क्रियान्वयन हो सकेगा। जय प्रकाश विविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि 1986 में विश्व के हर छह बच्चे में से एक बच्चा भारतीय था, जो शिक्षा के अधिकार से वंचित था। शिक्षा के अधिकार कानून लागू हो जाने के बाद भी नामांकन, छीजन, ठहराव व रुकावट की समस्या आज भी मौजूद है। इन मुद्दों को भी मुख्य धारा के स्कूलों में बच्चों के समावेशन के लिए विचार करना होगा। पटना विविद्यालय के कुलपति प्रो. रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि वर्ष 2031 तक जापान और कोरिया के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए स्कलों की आश्यकता नहीं पड़ेगी, लेकिन उस वक्त भारत में 7-8 करोड़ बच्चों के लिए अतिरिक्त स्कूल खोने जाने की आवश्यकता होगी। अतिथियों का स्वागत पटना विविद्यालय, शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. खगेंद्र कुमार ने किया। सेमिनार में प्रो. सविता कौशल और डॉ. कुमार संजीव ने भी विचार व्यक्त किये। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुधाकर प्रसाद सिंह ने और संचालन शाजिया फातिमा ने किया। सेमिनार के तकनीकी सत्र में विधि संकायध्यक्ष मो. शरीफ, डॉ. जेस्सी जॉर्ज, डॉ. वीणा प्रसाद, डॉ. किरण कुमारी, मोनव्वर जहां, डॉ. वाणी भूषण, प्रो. योगेंद्र वर्मा, डॉ. विक्रमजीत सिंह, झारखंड के डॉ. सचिन कुमार, महाराष्ट्र के अंकुश, रामचंद्र भंसोद, बिहार म्यूजियम के निदेशक यूसुफ, प्रभारी अपर निदेशक (प्रशासन) रणवीर सिंह राजपूत, रवि गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद् मौजूद थे।




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