महर्षि मेंहीं आश्रम में साप्ताहिक सत्संग शुरु

पटना (आलोक कुमार झा) । आज साप्ताहिक सत्संग की शुरुआत स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज के रामचरित मानस के उत्तरकाण्ड के पाठन एवं  संत सदगुरू महर्षि  मेँ हीँ परमहंस जी महाराज के भजन ” रामनाम अमर नाम भजो भाई सोई ” के गायन से प्रारंभ हुआ । स्वामी जी ने अपने वक्तव्य में स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी के दृष्टान्त देते हुए कहा कि वो कहा करते थे । जिस प्रकार चोर को अगर आभाष हो जाय कि दीवार के पीछे खजाना है तो उसकी चैन और नींद हराम हो जाती है उसी प्रकार अगर मनुष्य को यह विश्वास हो जाय कि राम के भक्ति से सुख मिलेगा तो वह जरूर करेगा । इसके पश्चात स्वामी चेतन देव जी महाराज ने अपने प्रवचन में कुछ सवाल के माध्यम से राम भक्ति को समझाना चाहा उन्होंने मन्दोदरी जो कि रावण की पत्नी थी उसका उदारहण दिया । इसी क्रम में इन्होंने कहा कि राम की भक्ति कही बाहर जाकर करने की जरूरत नहीं बल्कि अन्तः मन में पवित्रता के साथ ध्यान करके खुद का साक्षात्कार करने से हैं ।बाहर में दुःख ही दुःख है केवल शरीर को आनन्द प्रदान के लिए लगे रहते हैं लेकिन इसके अंदर में जो है उसके सुख के लिए क्या करते हैं अगर उसके कुछ नहीं किये तो कितनी बहादुरी हैं  कितनी होशयार हैं सोच लीजिये सारा का सारा यही रह जायेगा ।ये शरीर दिन ब दिन कमजोर होता चला जा रहा हैं इसका मकसद क्या हैं सोचिये इसी क्रम में कई महात्माओं के उदाहरण दिए और अंत में कहा राम भक्ति बिना पावे न सुख कोई कार्यक्रम का अंत गुरु कीर्तन और आरती से हुआ ।




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