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पटना वि वि को केन्द्रीय वि वि बनाने की मांग पर हो पुनर्विचार

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि पटना विश्वविद्यालय को केन्द्रीय वि वि बनाने की मांग पर पुनर्विचार होना चाहिए. वे आज लोक संवाद कार्यक्रम के पश्चात मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आप लोग आलेख पढिए. पूर्व के वर्षो में भी  हम संसद में यह मांग हम उठाते रहे हैं. यह कोई नई मांग नहीं है. हमलोग के कार्य काल में राज्य सरकार ने इस संदर्भ में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था. पटना विश्वविद्यालय का जो जनमानस में विशेष स्थान है उस नजरिए से पटना विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना चाहिए. वर्ष 1917 में भी केंद्र के कानून से ही पटना वि’वविद्यालय का गठन हुआ था. इसका निर्णय केंद्र को करना है. सेंटर ऑफ़ एक्सेलेंस के लिए विश्वविद्यालय का चयन होना है, जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों के संचालन और नियंत्रण की जिम्मेवारी कुलाधिपति (राज्यपाल) के पास होती है. हमलोगों को धन उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी होती है इसके लिए हमलोग प्रत्येक वर्ष 4 हजार करोड रुपये अनुदान के रूप में विश्वविद्यालयो को उपलब्ध कराते हैं. विश्वविद्यालय राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं होता है. विश्वविद्यालय एकेडमिक कैलेंडर बनाए, समय पर परीक्षा होनी चाहिए. जहां तक शिक्षको  की कमी का प्रश्न है तो इसके लिए लोक सेवा आयोग को इसकी जिम्मेवारी दी गई है. यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन का गठन करने के एक कानून बनाया गया है. इसके माध्यम से सारी चीजो का समाधान होगा. मेडिकल और इंजीनियरिंग के शिक्षको की भी कमी है. इसके समाधान के लिए विचार करने की जरुरत है. यह समस्या सिर्फ बिहार की नहीं बल्कि पूरे देश की है. उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए हमलोगों ने काफी काम किया है. वर्ष 2005 में 12.50 प्रतिशत बच्चे स्कूल से बाहर थे, आज यह आंकड़ा एक प्रतिशत से भी कम हो गया है. पहले लड़कियो  की संख्या स्कूलो में काफी कम थी. बालिका पोशाक योजना और साईकिल योजना चलायी गयी, जिसके कारण स्कूलों में छात्राओं की संख्या छात्रों के बराबर हो गई.




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