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हताशा से नहीं निकल पा रही है कांग्रेस

कुंवर पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह

लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस की करारी हार एवं हरियाणा, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, झारखण्ड दिल्ली एवं असम के विधान सभा चुनाव में निराशाजनक और शर्मनाक प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश में भी पराजय से कांग्रेस का मनोबल गिरा है। कार्यकर्ताओं में निराशा और जनता में उदासीनता से कांग्रेस मूर्च्छित अवस्था में है । 2017 में राजनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव थे परन्तु कांग्रेस के गठबंधन के फैसले ने उसकी नैया डुबो दी। सपा, बसपा की जातिगत राजनीति, दम तोड़ती क़ानून व्यवस्था, बढ़ता भ्रष्टाचार आदि के कारण जनता किसी विकल्प की तलाश में है। अच्छे दिन का वादा कर पूर्ण बहुमत में आई भाजपा सरकार ने महँगाई बढ़ाकर जनता के कमर ही तोड़ दी है । जनता इस धोखे के लिए भाजपा को भी सबक़ सिखाने का मन बना चुकी है, ऐसे में कांग्रेस के पास जनता की नब्ज़ टटोलते हुए अपनी धमक ज़माने का बेहतरीन अवसर है । उत्तर प्रदेश की हर दुर्दशा के लिए ग़ैर कांग्रेसी सरकारें ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि कांग्रेस तो २८ वर्षों से प्रदेश में सत्ता से बाहर है ।

किंतु दुर्भाग्य का विषय है कि उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हालात अनुकूल होने के बावजूद कमज़ोर एवं निस्प्रभावी नेतृत्व के चलते कांग्रेस हासिये पर है। मजबूत और योग्य कार्यकर्ताओं को दरकिनार रख कांग्रेस न जाने कौन सा खेल खेल रही है, यह समझ से परे है।

राज्यसभा सदस्य डॉ. संजय सिंह

राज्यसभा सांसद डा० संजय सिंह एक ऐसी ही शख़्सियत हैं, जिनकी क्षमता और ऊर्जा का उपयोग करने से कांग्रेस बचती रही है । डा० संजय सिंह का राजनैतिक जीवन काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। अपने शुरुआती दिनों में डा० संजय सिंह प्रदेश ही नहीं देश के तेज-तर्रार नेताओं में शामिल हो गये। अपनी सांगठनिक क्षमता, कुशल नेतृत्व, निर्भीकता, निडरता, दृढ़ इच्छाशक्ति, संघर्षशीलता आकर्षक व्यक्तित्व और गांधी परिवार से नजदीकी के कारण राजनीति के उस क्षितिज पर पहुँच गये, जहाँ पहुँचने की कल्पना करना दिवास्वप्न के समान है और जहाँ पहुँचने में लोगों का पूरा जीवन लग जाता है । डा० संजय सिंह ने अपनी राजनैतिक पारी उस वक्त प्रारम्भ की जब आजादी के बाद कांग्रेस के लिए सबसे कठिन दौर था। 1977 के आम चुनाव में पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ माहौल था और इंदिरा गांधी, संजय गॉधी जैसे दिग्गजों को जनता ने नकार दिया था। ऐसे कठिन समय में श्रीमती इन्दिरा गॉधी और श्री संजय गॉधी ने डॉ0 संजय सिंह को उ0प्र0 यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। 1977 से 1980 तक डॉ0 संजय सिंह के नेतृत्व में यूथ कांग्रेस ने संघर्षों और आंदोलनों के बल पर पूरे देश में ऐसा माहौल खड़ा किया कि 1980 में इंदिरा गॉधी पुनः सत्ता में आ गई। उस कार्यकाल को यूथ कांग्रेस का स्वर्णिम कार्यकाल कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति न होगी। डॉ0 संजय सिंह के इशारे पर हजारों नवयुवक सड़कों पर उतर आये। विधान सभा का घेराव, जेल भरो आंदोलन जैसे न जाने कितने सफल आंदोलन किये गये, जिसने प्रदेश सरकार एवं भारत सरकार की चूलें हिला दी। यूथ कांग्रेस की ऐतिहासिक सफलता से कांग्रेस पार्टी में डॉ0 संजय सिंह ने कुशल नेतृत्व क्षमता के साथ-साथ, संघर्ष के पुरोधा के रुप में अपनी एक पहचान बनाई। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर डॉ0 संजय सिंह अमेठी से विधायक निर्वाचित हुए तथा 1985 के विधान सभा चुनाव में रिकार्ड मतों से जीत हासिल की। 1982 से 1987 तक प्रदेश सरकार में दुग्ध, वन, डेयरी, युवा एवं खेलकूद, परिवहन मंत्री पद पर रहते हुए उल्लेखनीय कार्य किया।

हालांकि कांग्रेस पार्टी में अपने दूसरी पारी में डॉ0 संजय सिंह को वो महत्व नहीं मिला, जिसके वे हकदार हैं। 2004 के लोकसभा चुनाव में डॉ0 संजय सिंह को उ0प्र0 कांग्रेस चुनाव प्रचार अभियान का अध्यक्ष बनाया गया, अण्डमान निकोबार में सुनामी के कहर के बाद राहत कार्य के लिए अण्डमान भेजा गया किन्तु संगठन में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी न दिये जाने से डॉ0 संजय सिंह उपेक्षित ही रहे।

2009 के लोकसभा चुनाव में डॉ0 संजय सिंह को टिकट दिये जाने पर आखिरी समय तक सस्पेंस बना रहा। बड़े जद्दोजहद के बात नामांकन के आख़िरी दिनों में टिकट दिया गया और तो और जनपद में कांग्रेस संगठन के असहयोग और विरोध के बावजूद डॉ0 संजय सिंह ने अपने करिश्माई व्यक्तित्व के दम पर सुलतानपुर लोकसभा सीट से 1 लाख मतों से जीत हासिल की। इस ऐतिहासिक चुनाव में पार्टी के असहयोग और विरोध का आलम यह रहा की आख़िरी वक़्त पर बेनी प्रसाद वर्मा और प्रमोद तिवारी के कार्यक्रम रद्द कर चुनाव ख़राब करने की साज़िश रची गई । इसके बावजूद 24 वर्षों बाद सुलतानपुर की किसी भी सीट पर कांग्रेस का परचम शान से लहराया । इस अद्भुत सफलता के बावजूद डॉ0 संजय सिंह को न तो केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में शामिल किया गया और न ही संगठन में कोई जिम्मेदारी दी गई। डॉ0 संजय सिंह का मानना है कि पार्टी को मजबूत करने के लिए किसी पद पर रहे बिना भी कार्य किया जा सकता है। लेकिन सवाल है आख़िर कब तक और क्यों ?

अपने मजबूत इरादों के लिए प्रख्यात डॉ0 संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा के चुनावों के दौरान में कड़ाके की ठण्ड में लखनऊ, कानपुर, गाजीपुर, देवरिया, गोरखपुर एवं वाराणसी का सफल दौरा किया। जनसभाएं की, कार्यकर्ता बैठक की, गावों में चैपाल लगाई, गांव में ही रात्रि विश्राम भी किया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने में सफल रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि डॉ0 संजय सिंह जहाॅ भी गये, कई खेमों में बटी कांग्रेस एक मंच पर एकजुट दिखी, जो लोग घर बैठ गये थे, वे भी निकले और डॉ0 संजय सिंह को पूरे उत्तर प्रदेश में दौरा कर कांग्रेस को पुनर्स्थापित करने के इस सिलसिले को जारी रखने का आवाह्न किया। 1977-80 के दौर में जिन लोगों ने कांग्रेस को पुनः सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, आज उनमें से अधिकांश लोग जीवन के चौथे चरण में प्रवेश कर चुके हैं, किन्तु डॉ0 संजय सिंह को अपने बीच पाकर उनके अंदर भी संघर्ष कर कांग्रेस को पुनः सत्ता में लाने का जज्बा दिखाई दिया, उनकी बूढ़ी आँखों में फिर से जीत की चमक दिखाई दी। डॉ0 संजय सिंह ने भी यह माना कि 1977 में भले हमारे पास ज्यादा सीटें थी और आज केवल 44 है किन्तु आज जनता और कार्यकर्ताओं के बीच हमारी स्थिति काफी बेहतर है। 2017 के विधान सभा चुनाव में हुई करारी शिकस्त के बाद भी कांग्रेस का नेतृत्व सत्ता पक्ष के सामने एकदम निरीह और कमजोर दिख रहा है I कांग्रेस पार्टी को इस बात को ध्यान में रखते जनता को यह विश्वास दिलाना होगा कि हम उनके सुख-दुख, अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़े है। कमजोर नेतृत्व के साथ जनता भी नही देती ये पिछले विधानसभा चुनाव से सीधा स्पष्ट हो गया है। कांग्रेस पाटी के सभी कार्यकर्ताओं का आवाह्न करते हुए डॉ0 संजय सिंह ने उन्हें कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर जनसमस्याओं के निराकरण हेतु सड़कों पर उतरने, संघर्ष और आंदोलन के रास्ते पर चलने को तत्पर रहने को कहा।

निसंदेह देश स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिनों दिन बढ़ती लोकप्रियता और देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समकक्ष विपक्ष के पास कोई उपयुक्त चेहरा मोर्चा लेने के लिए नहीं है I आज के वर्तमान दौर में और 2019 के आम चुनावों के दृष्टिकोण से प्रदेश और देश में कांग्रेस के हाथ को मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक संख्या में सक्रिय कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है जिसे एक कुशल और अनुभवशाली नेतृत्वकर्ता की सख्त आवश्यकता है I निश्चय ही डॉ0 संजय सिंह एक ऐसे योद्धा हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने करिश्माई नेतृत्व से स्थितियों को बदलने का माद्दा रखते हैं । उ0प्र0 में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की चर्चाएं गर्म हैं। सूत्र बताते है कि कांग्रेस नेतृत्व डॉ0 संजय सिंह को प्रदेश की कमान सौंपने के लिए चर्चा कर रही है। यदि ऐसा होता है तो आगामी लोकसभा चुनावों के परिणाम चकित करने वाले हो सकते हैं। हालाँकि यह शीर्ष नेतृत्व के निर्णय पर आधारित है कि वो उत्तर प्रदेश को लेकर कितना गम्भीर है ?




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