News Flash
Search

‘लो विजन’ वाले भी जी सकते हैं सामान्य जिंदगी

‘लो विजन’ वाले व्यक्ति भी सामन्यतया अपने आपको अँधा समझ लेते हैं. लिहाजा वे अंधे व्यक्ति जैसा व्यवहार करने लग जाते हैं. वे हताश और निराश हो जाते  हैं. उनका सामान्य जीवन जीना भी दुश्वार हो पड़ जाता है. लेकिन ऐसे ‘लो विजन’ वाले बच्चे और युवाओं को निराश होने की जरुरत नहीं है. दृष्टि सहायक उपकरणों की सहायता से वे भी अब सामान्य जिन्दगी जी सकते हैं. ऐसा मानना बिहार के इकलौते लो-विजन एक्सपर्ट डॉ. राजीव प्रसाद का ।

क्या होता है लो-विजन ?

डॉ. राजीव कहते हैं कि लो-विजन का मतलब है ‘अल्प दृष्टि’. इस दिव्यांगता से ग्रस्त बच्चे या बड़े अपना इलाज आई हॉस्पिटल में कराते हैं लेकिन फायदा न होने पर वह कम दृष्टि के साथ ही जीवन जीने पर मजबूर हो जाते हैं. देश में अल्प दृष्टि वाले बच्चों की संख्या काफी बढ़ चुकी है. जागरुकता न होने के कारण इन्हें स्कूल में भी अच्छा माहौल नहीं मिल पाता और कई बार इन्हें स्कूली पढ़ाई भी छोड़नी पड़ जाती है.शिक्षक इन्हें स्पेशल स्कूल भेजे जाने का भी तर्क देते हैं. लेकिन अगर थोड़ी से जागरुकता हो तो ऐसे बच्चे न सिर्फ हंसते-खेलते अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं बल्कि उस आनंद के उस माहौल का हिस्सा भी बन सकते हैं जिन्हें यह अपनी प्राकृतिक कमी से खो चुके होते हैं. विश्व के 28 करोड़ से ज्यादा लोगों को नेत्रहीनों की श्रेणी में गिना जाते हैं तकनीकी आधार पर इनमें से लगभग 4 करोड़ लोग ही पूरी तरह नहीं देख सकते, बाकी 24 करोड़ लोग ‘लो विजन’ ग्रस्त हैं.

लो-विजन डिवाइस के जरिये वे जी सकते हैं सामान्य जिंदगी

डॉ. राजीव कहते हैं कि टेलिस्कोप, मैग्निफायर्स जैसे लो-विजन डिवाइस की सहायता से अल्प-दृष्टि वाले बच्चे सामान्य बच्चों की तरह घर और स्कूल में पढाई जारी रख सकते हैं.




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *