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शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाती ‘हिंदी Medium’

नयी दिल्ली । फिल्म निर्देशक साकेत चौधरी की फिल्म ‘हिंदी Medium’ वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य पर सावलिया निशान लगाती प्रतीत होती है. फिल्म में इरफान खान और दीपक डोबरियाल के साथ पाकिस्तानी अदाकारा सबा कमर मुख्य भूमिका में है. फिल्म की पटकथा दिल्ली की है जहां के चांदनी चौक के बाजार में राज बत्रा (इरफान खान) लहंगे की दुकान चलाता है और उसके पास पैसे की कोई कमी नहीं. वह पत्नी मीता (सबा कमर) से बहुत प्यार करता है. दोनों की बेटी है पिया, जिसका एडमिशन मीता किसी निजी अंग्रेजी स्कूल में कराना चाहती है. मिशन एडमिशन के तहत राज और मीता दिल्ली के बड़े स्कूलाें की खाक छानते हैं और बेटी के एडमिशन के लिये चांदनी चौक छोड़ दिल्ली के पॉश इलाके वसंत विहार में शिफ्ट हो जाते है. पिया को किसी अच्छे अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिला नहीं मिलने पर दोनों गरीबों के लिए आरक्षित कोटे में दाखिले का प्रयास भी करते हैं और सफल हो जाते है. लेकिन इसके बाद रवि को अपनी गलती का एहसास होता है कि उसने किसी गरीब का हक मारा है. यहां से फिल्म का ट्रैक बदलता है और यह दिखाया जाता है कि किस तरह अमीर लोग गरीबों का हक छीन रहे हैं और शिक्षा का अधिकार कानून का दुरुपयोग हो रहा है. निर्देशक ने ‘हिन्दी मीडियम’ के जरिये शिक्षा प्रणाली के साइड इफेक्ट्स को लोगों के सामने लाया है. च्छे विषय के साथ न्याय करने में वे कामयाब रहे. फिल्म का क्लाइमेक्स नाटकीय लगता है.

इरफान खान ऐसे अभिनेता है जिनकी आंखें भी बाेलती हैं और इस फिल्म को देखने के बाद लगा की एक कारोबारी, पिता और पति का किरदार इस शानदार ढंग से शायद ही काेई और निभा पाता. फिल्म के आखिर में उनका मोनोलॉग सीख देता है. सबा कमर पति को अंगुलियों पर नचाने वाली पत्नी के किरदार में खूब जमी हैं. दीपक डोबरियाल ने गरीब इंसान के किरदार में प्रभावित किया है. काउंसलर की भूमिका में तिलोत्तमा शोम उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहीं. अमृता सिंह, नेहा धूपिया और संजय सूरी के लिये फिल्म में ज्यादा कुछ नहीं था. फिल्म में गाने कम हैं, आतिफ असलम की आवाज में ‘हूर’ सुकून देता है. गुरु रंधावा का ‘सूट-सूट’ पार्टी नंबर है जो रिलीज से पहले ही हिट हो चुका है.

(सौजन्य: वार्ता)




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