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उत्तर प्रदेश में मोदी लहर के मायने

कुमार नीरज*

उत्तर प्रदेश में मोदी लहर के चलते भाजपा को तीन चौथाई बहुमत मिली. भाजपा का 14 वर्ष का वनवास खत्म हुआ. लिहाजा यूपी में भी ‘मोदी सरकार’ बनेगी. चुनाव परिणाम ने स्थानीय पार्टियों का एकाधिकार ख़त्म कर दिया. यहाँ तक कि प्रशांत किशोर जैसे राजनीतिक पार्टियों के वोट प्रबंधकों को भी मुंह की खानी पड़ी. प्रधानमंत्री ने जिस तरीके से चुनाव प्रचार किया. इससे देश में प्रसिडेंशियल इलेक्शन का आभाष दिला गया. सब कुछ के बावजूद पूरा यूपी मोदीमय हो गया. इस चुनाव में मोदी लहर के कई मायने हैं. इस चुनाव में प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी ने कई प्रयोग किए. उन्होंने पिछड़ी एवं अतिपिछड़ी जातियों को भाजपा के तरफ गोलबंद किया. इसी क्रम में पार्टी की कमान पिछड़ी जाति के जमीनी नेता केशव प्रसाद मौर्या के हाथों सौंप दी. लिहाजा ओबीसी-एमबीसी फैक्टर ने भाजपा को बड़ी सफलता दिलाई. उन्होंने गैर-यादव  और गैर-जाटव पिछड़े वोटरों का ध्रुवीकरण किया. इस पर नोटबंदी ने कमाल का असर दिखाया. नोटबंदी से गरीबों के मन में संतोष की भावना आई. इसे कालाधन के मालिकों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा गया. शायद यह भी एक कारण रहा कि गरीब मतदाताओं ने नरेद्र मोदी को गरीबों का मसीहा बना दिया. सवर्ण जातियां भाजपा के पक्ष में पहले से गोलबंद थी. साथ ही पार्टी को दलित वोटरों का भी साथ मिला. दलित समुदाय के लोगों को मायावती का नेतृत्व इस बार रास नहीं आया. भाजपा की नई सोशल इंजीनियरिंग काम आ गई. इसी इंजीनियरिंग ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के यादव-मुस्लिम समीकरण को जड़-मूल से ध्वस्त कर दिया. भाजपा ने इस चुनाव में मुस्लिम समुदाय के एक भी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया. फिर भी यूपी का चुनावी परिणाम ने राजनीतिक पंडितों और अल्पसंख्यकों के उस मिथक को तोड़ दिया जिन्हें भ्रम हो चला था कि बगैर अल्पसंख्यक मुसलमानों के राजनीति की ही नहीं जा सकती. बसपा का आधार दलित वोट इस बार खिसक सा गया जो मायावती के राजनीतिक ढलान की ओर इंगित कर गया. हालांकि मायावती ने मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए कोई कोड़-कसर नहीं छोड़ी. उसने मुख़्तार अंसारी जैसे आपराधिक छवि वाले कई मुस्लिम नेताओं को टिकट दिया था. लेकिन मायावती की मनुवादी विरोधी राजनीति दलित-मुसलमानों को रास नहीं आई. मोदी को विपक्ष ने जितनी सियासी चुनौतियां दी, मोदी ने सबको स्वीकार किया. अधिकाँश चुनौतियों से वे पार भी पा गए.

(*लेखक बिहार टुडे न्यूज़ पोर्टल के स्टेट ब्यूरो चीफ हैं)




One thought on “उत्तर प्रदेश में मोदी लहर के मायने

  1. अ‍जय कुमार तिवारी

    सम्पाद्कीय अच्छा लगा. उत्तर प्रदेश में मोदी की लहर ने परिवारवादी राजनीति करने वाले दलो को मतियामेत कर दिया.

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