ग्लूकोमा की जानकारी ही बचाव: डॉ. मोहनका

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ग्लूकोमा मोतियाबिंद के बाद अंधापन का विश्व में दूसरा सबसे बड़ा कारण है. वास्तव में ग्लूकोमा आँख की बीमारी है जिसमें आँख का इंट्राओकुलर प्रेशर बढ़ जाता है. यदि इसे बिना उपचार के छोड़ दिया जाये तो व्यक्ति दृष्टि खोता जाता है और अंधा भी हो सकता है. ऐसा मानना है राजधानी पटना स्थित श्री बाला जी नेत्रालय के फेको सर्जन एवं रेटिना विशेषज्ञ डॉ. शशि मोहनका का. डॉ. मोहनका कहते हैं कि दबाव में वृद्धि से, आँख से मस्तिष्क तक सन्देश ले जाने वाली नस, ऑप्टिक नर्व, क्षतिग्रस्त हो जाती है. ग्लूकोमा को दृष्टि का मूक अपराधी कहा जाता है. सामान्यतया यह दोनों आँखों को प्रभावित करता है.

ग्लूकोमा के चार प्रमुख प्रकार : 1. ओपन-एंगल ग्लूकोमा, 2.एंगल क्लोसर ग्लूकोमा, 3. जन्मजात ग्लूकोमा एवं 4. सेकेंड्री ग्लूकोमा

ग्लूकोमा के कारण

हाई ब्लडप्रेशर: डॉ मोहनका कहते हैं कि ब्लड प्रेशर के मरीज को ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा रहता है यदि मरीज का प्रेसर बढ़ता है तो उसके आंख का भीतरी दबाव तुरंत बढ़ सकता है. तब आँख इसके लिए प्रयत्न करके स्वयं पर के दबाव को उसके सामान्य स्तर तक लाएगी. लम्बे समय तक बढ़ा हुआ रक्तचाप आँख में प्रवाह को घटा सकता है जो कि ग्लूकोमा के लिए हानिकारक होता है. डॉ. मोहनका कहते हैं कि आँख के बढ़े दबाव वाले हर व्यक्ति को ग्लूकोमा नहीं होता। कुछ लोग आँख के बढ़े दबाव को अन्य लोगों से बेहतर सहन कर सकते हैं. साथ ही, दबाव का कोई स्तर किसी व्यक्ति के लिए अधिक हो सकता है जबकि अन्य लोगों के लिये वह सामान्य होता है.
ऑप्टिक नर्व का सुखना: ऑप्टिक नर्व की महीन शिराओं का बढ़ता हुआ नुकसान धीरे-धीरे दृष्टि क्षेत्र के नुक्सान और आखिरकार दृष्टि के नुकसान अर्थात दृष्टिहीनता में बदल जाता है. ग्लूकोमा के अधिकतर रूपों में रोग के काफी बढ़ जाने तक रोगी को लक्षणों का पता नहीं चलता. रोगी को परिधीय दृष्टि की शुरुआती हानि समझ में नहीं आती, और धीरे बढ़ने के कारण इसको समझ पाना बगैर खास जाँचों के लगभग नामुमकिन है. ग्लूकोमा में नाक के परिधीय दृष्टि क्षेत्र की हानि सबसे पहले होती है। बढ़ते हुए परिवर्तनों और दृष्टि क्षेत्र के दोषों के सन्दर्भ में इनको संभालना ग्लूकोमा के रोगी के मामले में सबसे कठिन कार्य है.

ग्लूकोमा का इलाज व नियंत्रण

डॉ मोहनका कहते हैं कि ग्लूकोमा के कारण हुआ दृष्टि का कोई भी नुकसान स्थाई होता है और वापस नहीं आ सकता. यदि शुरुआती चरण में ही पता चल जाये तो ग्लूकोमा को नियंत्रित किया जा सकता है और आगे का नुकसान थोड़ा या बिलकुल ना के बराबर हो सकता है. यदि बिना उपचार छोड़ दिया जाये तो पहले परिधीय दृष्टि, बाद में केंद्र की दृष्टि प्रभावित होगी और दृष्टिहीनता हो सकती है. इसलिए आँखों की नियमित सुरक्षात्मक जाँच आवश्यक और महत्वपूर्ण हैं.




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