विश्वविद्यालयों में जून 2018 तक बायोमेट्रिक के जरिये हाजिरी

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पटना । बिहार के विश्वविद्यालय मुख्यालयों और स्नातकोत्तर विभागों में मार्च 2018 तक और कॉलेजों में जून 2018 तक बायोमेट्रिक के जरिये शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की हाजिरी सुनिश्चित की जाएगी. ऐसा निर्णय राजभवन में आज विश्वविद्यालयों के क्रिया-कलापों की समीक्षा के लिए राज्यपाल-सह-कुलाधिपति सत्य पाल मलिक की अध्यक्षता में हुई प्रथम मासिक बैठक में ली गई. आयोजित की गई , इससे कार्यस्थल से नदारद रहने वाले कर्मियों के क्रियाकलापों पर अंकुश लगेगी.

विश्वविद्यालय और कॉलेज हुआ वाई-फाई युक्त

राज्य सरकार के ‘सात निश्चय’ के अन्तर्गत 290 विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संस्थापित ‘वाई फाई’ योजना की समीक्षा की गई. विद्युत-आपूर्ति की असुविधा, नोडल आफिसर द्वारा आनरशिप ग्रहण नहीं करने आदि कारणों से यूजर एनरोलमेंट में काफी कमी पाई गई. निर्णय लिया गया कि अधिकाधिक यूजरों को यूजर्स नेम एण्ड पासवर्ड अविलम्ब उपलब्ध करा दिए जाएँ तथा इसके लिए महाविद्यालय/विश्वविद्यालय के सूचना-पट पर ‘आवश्यक सूचना’ भी प्रकाशित कर दी जाय. कुलपतियों को ‘वाई-फाई’ की यह सुविधा प्रथम चरण में सभी विश्वविद्यालय मुख्यालयों एवं स्नातकोत्तर विभागों तथा बाद में सभी महाविद्यालयों में शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया.

सभी महाविद्यालय होंगे ‘वाशरूम’ युक्त
सूबे के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालय भवनों में छात्राओं के लिए ‘वाशरूम’ का निर्माण कार्य मार्च 2018 तक पूरा कर लिया जायेगा. जरूरत के मुताबिक सहयोग के लिए सुलभ इंटरनेशनल से भी सम्पर्क किया जाएगा.

दिसंबर-जनवरी महीने में चलेगा ‘विशेष स्वच्छता अभियान’

दिसम्बर के अंतिम सप्ताह से लेकर आगामी जनवरी के शुरूआती सप्ताह तक में प्रत्येक विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय अपने परिसर में ‘विशेष स्वच्छता अभियान’ संचालित किया जायेगा. इसमें एन.सी.सी. और एन.एस.एस. के विद्यार्थियों के साथ-साथ सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी शामिल होंगे. इस विशेष स्वच्छता अभियान का अनुपालन प्रतिवेदन 5 जनवरी, 2018 तक भेजने को कहा गया, साथ ही इस अभियान को प्रत्येक महीने दुहराने का भी निर्णय हुआ.

छात्र संघ का चुनाव शीघ्र
छात्र-संघ चुनाव शीघ्र कराने हेतु कुछ कुलपतियों से प्राप्त सुझावों पर शीघ्र विचार करते हुए निर्णय लिये जाने पर सहमति बनी.

सीनेट की आजीवन सदस्यता हेतु दान राशि 25 लाख
विश्वविद्यालयों में राशि दान कर सीनेट का आजीवन सदस्य बनने के लिए निर्धारित राशि 25 हजार को बढ़ाकर 25 लाख करने पर भी गंभीरतापूर्वक विचार का निर्णय लिया गया.

क्रेडिट बेस्ड चॉइस सिस्टम के आधार पर विकसित होगा नया पाठ्यक्रम

विश्वविद्यालयों में पढ़ाये जाने वाले विभिन्न विषयों के पाठयक्रम अत्यधिक पुराने हो गये हैं. अत: क्रेडिट बेस्ड चॉइस सिस्टम के आधार पर नया पाठयक्रम तैयार करने का भी निर्णय लिया गया. इसके लिए पटना विश्वविद्यालय के कुलपति को सक्षम एवं अनुभवी अध्यापकों को प्रतिनियुक्त करने के लिए कहा गया जो यूजीसी तथा अन्य केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के पाठयक्रमों को ध्यान में रखते हुए नया पाठयक्रम तैयार करने में सहयोग करेंगे. नया पाठयक्रम शीघ्र बनाकर चरणबद्ध तरीके से अन्य सभी विश्वविद्यालयों में भी लागू किया जायेगा ताकि  शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाया जा सके.

समीक्षात्मक बैठक में सूबे के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव, राज्यपाल के प्रधान सचिव, सूचना प्रावैधिकी सचिव, शिक्षा विभाग के अपर सचिव आदि उपस्थित थे.




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