मुख्यमंत्री ने की प्रधानमंत्री से औपचारिक मुलाकात

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वड़ोदरा । गुजरात के नवनिर्वाचित विजय रूपाणी के शपथ ग्रहण समारोह में बिहार सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी ने आने वाले समय में एनडीए में उनकी बड़ी भूमिका के दरवाजे खोल दिए हैं. खास बात यह है नीतीश 14 साल बाद गुजरात गए. मिशन 2019 के मद्देनजर और शिवसेना-बीजेपी के बिगड़ते रिश्तों को देखते हुए नीतीश के जेडीयू का एनडीए में रहना महत्वपूर्ण है. नीतीश के लिए समय का एक पूरा पहिया घूम चुका है. वह आखिरी बार गुजरात दंगों के एक साल बाद यानी 2003 में गुजरात गए थे, तब उन्होंने वहां एक रेल प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के काम की तारीफ की थी. लेकिन पांच साल बाद जब नीतीश कुमार बिहार चुनाव की तैयारी करने लगे तब तक स्थिति बदल चुकी थी. अल्पसंख्यक वोटरों को रिझाने के मकसद से नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को बिहार में चुनाव प्रचार करने से रोक दिया. मोदी और नीतीश के रिश्तों में और खटास तब आई जब 2010 में बीजेपी ने अखबारों में मोदी और नीतीश कुमार की साथ वाली तस्वीरें छपवा दीं. इसके बाद नीतीश कुमार ने मोदी के लिए आयोजित की गई डिनर पार्टी रद्द कर दी. मोदी से नाराजगी के बावजूद नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ अपना गठबंधन नहीं तोड़ा और 2010 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की. हालांकि बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी का आगे बढ़ना नीतीश कुमार को पसंद नहीं आया और उन्होंने 2013 में बीजेपी के साथ अपने 17 सालों के गठबंधन को तोड़ने का ऐलान किया.




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